आखिर कब तक बेटियां जलेंगी
आखिर कब तक बेटियां जलेंगी
आखिर कब तक , कभी पैदा होते ही , कभी दहेज़ के नाम पे, कभी हवस और भूख
के नाम पे | क्यों हर बार उसे ही सजा मिलाती है
जिसकी कोई गलती नहीं होती | क्यों
हमेशा बेटियों को ही समझाया जाता है , दबाया जाता है एसा जताया जाता है कि उनको
हमेशा समाज से बच के रहना है | क्यों बेटियां अपने ही घर में सुरक्षित नहीं रहती |
गलती हम सब की है | हर माँ-बाप अपने बेटियों को
तो हर चीज समझाते हैं सिखाते हैं,लेकिन अपने बेटों को आज़ाद छोड देंते है |उन्हें
नहीं सिखाते की समाज में उनकी क्या जिम्मेदारी है, महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार
करना है | हमें सुधार अपने घर से शुरू करने की आवशयकता है | हर लड़की किसी की माँ ,
बहन बेटी होती है, हमारे घरों में जब तक हम अपने बेटों को घर में माँ ,बहनों की
इज्जत करना नहीं सिखायेंगे तो वे बाहर किसी की माँ बहनों और बेटियों की इज्जत नहीं
कर सकते |
सरकारों का भी दाइत्व बनता है कि वो एसे कठोर दंड विधान बनाए जिससे कोई
भी पाप करने की सोचने वाले की पहले ही रूह कॉप जाए |
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